प्यार की परिभाषा

आज के समय मे प्यार को दो भागो मे विभाजित किया जा सकता है ।आप सोच रहे है कि प्यार को किसी विषय कि तरह प्यार को विभाजित किया जा सकता है।

हम प्यार विषय पर कयो चर्चा करे है।

क्योकि  आज मनुष्य जाति से असंभव कुछ भी चीज नहीं हैं। आज विज्ञान को दम पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता इतना अग्रिम हो गया है कि रोबोट मनुष्य कि तरह सोच सकता है लेकिन मनुष्य भोग विलाश  वाला प्यार कर रहा है।

    आज से समय मे Prongrphi हर कोई देखता है आप लोग समझ गये होगें कि नैतिकता का पतन किस तरह हो रहा है।

   क्या होगा अगर हर कोई नागरिक स्वतंत्रता को अधिकारों का दुरूपयोग करे हर कोई नैतिक जिमेंवारी से दुर भागे।

लेकिन मैं किसी कानून या सामाजिक दबाव मैं करने कि बात मैं नहीं करता मैं तो एक सरल,सहज एवं सैधांतिक विधि का अनुपालन करने से लिए कह रहा हुं 

     मैं आप को बताऊगा कि प्यार क्या होता है।  आप कहेंगे कि आप तो कोई सँत महात्मा हैं नही तो आप किस आधार पर यह शर्त कर सकते।

   मैं अपने अनुभव व सोच से आधार पर कह सकता हुँ।::

   पिछले पोस्ट मे बात कर कहा था कि मैं यह कर सकता ।  हूँ मैं एक पते बात बताता हूँ कि किसी से पास( प्रेमी एवं प्रेमिका )एक से ज्यादा दो या तीन लोग रखता है।  और किसी के पास (प्रेमी या प्रेमिका) एक या एक भी नहीं तो अब आप लोग सोच रहे होंगे कि ज्यादा लोग (प्रेमी या प्रेमिका)

रखने मैं लाभ है क्योंकि आज समय मे युवा जोड़ा कर रहे हैं लोग काफ़ी समय देते हैं अंत मे उन लोग भोले लोग (प्रेम या प्रेमिका) से शादी करते है। इसमें सीधे साधे लोग फस जाते हैं अब शुरुआत होता है एक तरफा प्रेम इससे वैवाहिक जीवन खराब  हो जाता हैं लेकिन लोग क्या कर सकता है ।

  इसका एक हल है कि प्रेमी खूबसूरत लड़कियों से सम्बंध या विवाह न करे लेकिन मै यह सब विचार पर ज्यादा जोर नहीं देते लेकिन मै सीधा हल बताया मेरी व्यक्तिगत राय है ।

  अब आता है सच्चा प्रेम के अर्थ पर तो यह विषय पर विस्तृत बात करुगाँ तो सबसे पहले आत्मा शब्द को जानना होगा यह किसी कि भी हो सकता आत्मा हो सकता है जानवर व जीव का लेकिन अभी फिलहाल मैं जानवरों को आत्मा को छोड़ देता हूँ   मै मनुष्य के मन कि बात कर रहा हुँ।

Published by Dhirendra Singh

I'm great philosopher in this case in life

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